अहमद शरीफ़ चौधरी कौन हैं — विवादित पाकिस्तान आर्मी प्रवक्ता
👤 प्रोफ़ाइल और करियर
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अहमद शरीफ़ चौधरी पाकिस्तान आर्मी की मीडिया और पब्लिक रिलेशन्स विंग, इंटर‑सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स (ISPR) के 22वें डायरेक्टर जनरल (DG ISPR) हैं।
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वे इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (EME) कोर से आते हैं और DG ISPR बनने वाले पहले EME ऑफिसर हैं।
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11 मई 2024 को चौधरी को लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रोन्नत किया गया और DG ISPR की पोस्ट पर बने रहे।
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ISPR की कमान संभालने से पहले वे डिफेंस साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑर्गनाइजेशन (DESTO) के डायरेक्टर जनरल रहे।
पिछले महीनों में चौधरी पाकिस्तान आर्मी के प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं,
खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय मामलों पर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान।
🔥 क्यों चर्चा में हैं — “विंक” विवाद
9 दिसंबर 2025 को (10 दिसंबर को रिपोर्ट) प्रेस ब्रीफिंग के एक वीडियो में चौधरी एक महिला पत्रकार, अब्सा कमाल, की ओर इशारा करते हुए नजर आए।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को “ज़ेहनी मरीज” कहने के तुरंत बाद ऐसा किया।
पत्रकार ने सवाल पूछा कि खान को “राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा” और “एंटी-स्टेट” कहने वाले हालिया आरोप पिछले आरोपों से कैसे अलग हैं।
चौधरी का “ज़ेहनी मरीज” कहना और उसके बाद विंक करना वायरल हो गया।
आलोचकों ने इसे “अव्यवसायिक” और “असम्मानजनक” बताया।
⚠️ पृष्ठभूमि और विवाद
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चौधरी हाल ही में क्षेत्रीय तनाव और पाकिस्तान-भारत टकराव के दौरान आक्रामक मीडिया ब्रीफिंग के लिए जाने जाते हैं।
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उनकी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठे हैं;
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बताया जाता है कि उनके पिता सुल्तान बशीरुद्दीन महमूद थे,
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जिन पर पहले चरमपंथी नेटवर्क से जुड़ने के आरोप लगे थे।
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आलोचकों का कहना है कि उनका यह व्यवहार पाकिस्तान सेना की छवि पर असर डाल सकता है।
✍️ इस विंक का मतलब — व्यापक प्रभाव
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प्रोफेशनलिज़्म और सम्मान: आलोचकों के अनुसार यह gesture पेशेवर गरिमा का उल्लंघन है।
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मीडिया-सैन्य संबंध: इस घटना ने पाकिस्तानी मीडिया और सेना के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध को और गहरा कर दिया।
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जनता की धारणा और लैंगिक संवेदनशीलता: वीडियो ने महिला सम्मान और समाज में लैंगिक समानता की बहस को बढ़ाया।
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राजनीतिक ध्रुवीकरण: सवाल इमरान खान जैसे विवादित नेता पर था, इसलिए विंक को उपेक्षापूर्ण या मजाकिया माना गया।
✅ निष्कर्ष
लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ़ चौधरी सिर्फ एक प्रवक्ता नहीं हैं, वे पाकिस्तान आर्मी का प्रमुख मीडिया चेहरा हैं। EME से DG ISPR बनने तक उनका सफर अहम है।
लेकिन हालिया “विंक” विवाद ने पेशेवर और नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“क्या आपको लगता है कि सैन्य प्रवक्ताओं को अधिक पेशेवर और सम्मानजनक बनने के लिए कड़े मानक अपनाने चाहिए? अपने विचार कमेंट में साझा करें और चर्चा में शामिल हों।”




























































