एक और घोटाला मुझे ऐसा लगता हैं जीतने भी घोटाले जो politicians और business के अलावा आम जनता में से कोई करता हैं ना तो वो इंसान कही ना कही हड़ चुका होता हैं और सिस्टम को बहुत अच्छे से समझ चुका होता हैं, लेकिन फायदा होता कुछ नही हैं, ये घोटाले को अंजाम देने वाले हैं, निर्मल सिंह भंगू, किसी जमाने में पंजाब के रोपड़ में चमककौर साहिब गांव में साइकिल पर दूध बेचा करते थे, समय का भरोसा नही इसलिए कहती हूँ सबसे बना कर चलो कौन कब क्या बन जाए पता नही, निर्मल सिंह भंगू ने अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों में घर-घर जाकर दूध बेचा. इसके बाद कुछ बड़ा करने की इच्छा मन में जगी, देखा मैने पहले ही बोल था इंसान हड़ चुका होता हैं, वरना दूध का business इतना भी बुरा नही खैर, निर्मल सिंह भंगू 1970 में कोलकाता चले आए, फिर उन्होंने पीरलेस नाम की चिटफंड कंपनी में काम किया और फिर गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड कंपनी में भी चिटफंड बिजनेस से जुड़े और काम सीखा। करीब 10 साल अलग-अलग कंपनी में काम करने के बाद और pro बनने के बाद साल 1980 में निर्मल सिंह भंगू ने पर्ल्स गोल्ड फॉरेस्ट लिमिटेड की स्थापना की, इस चिटफंड कंपनी ने निवेशकों को हाई रिटर्न देने का वादा किया वक्त के साथ-साथ निर्मल सिंह भंगू का कारोबार तेजी से बढ़ता गया. लेकिन साल 2013-2014 में पर्ल्स चिटफंड घोटाले का खुलासा हुआ और 45000 करोड़ का स्कैम सामने आया, आगे बड़ने से पहले ये जान लेते हैं की chit फंड आखिर हैं क्या? कैसे काम करती हैं, चिट फंड एक financial resource है जिसका use उधार लेने और बचत दोनों में किया जाता है। चिट फंड एक तरह की financial arrangement है, जिसमें कुछ व्यक्ति नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि एकत्र करते हैं और जमा करते है, लोग इसमे इस समझ और समझौते के साथ ही जुडते हैं, एक सदस्य प्रत्येक अंतराल के दौरान एकत्रित की गई कुल राशि प्राप्त करेगा, यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि प्रत्येक सदस्य को एकत्रित धन का अपना हिस्सा नहीं मिल जाता, थोड़ा विस्तार और आसान भाषा में समझते हैं चिट-फंड एक स्कीम की तरीके से काम करती हैं, जिनमे कुछ memebers equally पैसा उस कंपनी को देते हैं, लेकिन इसमे टाइम boundation होती हैं उस टाइम के अंदर आपको आपको जो पैसा डिसाइड किया हुआ होता हैं वो जमा करना होता हैं, जब सबका पैसा इकखट्टा हो जाता हैं तो , नीलामी या लॉटरी प्रणाली के माध्यम से, एक व्यक्ति को चुना जाता है, और उस व्यक्ति को पैसा दिया जाता है, बड़े शहरों में इन चीजों के नाम बदल जाते हैं लेकिन इसी चीज को यूपी के लोग पत्ती खुलना बोलते हैं, जो इसी process में काम करती हैं, अब आते भंगू भैया के पास पर्ल्स ग्रुप के इस घोटाले में करीब 5 करोड़.investors के 45000 करोड़ रुपये डूब गए. हालांकि, .investors के अनुसार यह रकम 60,000 करोड़ है. इस मामले में निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए 2015 में कमेटी का गठन हुआ जिनकी निगरानी में 21 लाख निवेशकों को पैसा मिला है. लेकिन, फिर भी सवा 5 करोड़ से ज्यादा लोगों को अब भी अपने पैसे मिलने का इंतजार है और शायद ये इंतज़ार उम्मीद ही बन कर रह जाएगी, अब आप सोच रहे होंगे की जब सब चल रहा हैं तो में हैं तो भंगू का क्या हुआ या वो क्या कर रहे हैं, actually वो कुछ करने के लायक ही नही बचे क्यूंकी उनका निधन हो गया हैं, पर्ल्स ग्रुप के फाउंडर निर्मल सिंह भंगू बीमारी के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे, लेकिन कुछ दिनों के बाद डील की बीमारी की वजह से उन्होंने आपको बता दे की इससे पहले निर्मल सिंह भंगु तिहाड़ जेल में बंद थे निर्मल सिंह भंगू को तबीयत खराब होने पर उन्हे दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था. निर्मल सिंह भंगू तो दुनिया छोड़कर चले गए लेकिन साढ़े 5 करोड़ लोगों की तबीयत खराब करके चले गए या यूं कहे की बड़ा झटका देकर चले गए।




























































